'मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर....', शशि थरूर के इस शायराना अंदाज के क्या हैं मायने? - Bindaas Bol

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Wednesday, 28 September 2022

'मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर....', शशि थरूर के इस शायराना अंदाज के क्या हैं मायने?

 


कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के लिए नामांकन करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर है. उससे पहले चुनाव को लेकर हलचल बढ़ गई है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के भी अध्यक्ष चुनाव के लिए नामांकन करने की बात कही जा रही है. इससे पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) भी नामांकन दाखिल करने का एलान कर चुके हैं. 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल करने से पहले बुधवार (28 सितंबर) को एक शायरी के जरिये परोक्ष रूप से यह दावा किया कि उनकी उम्मीदवारी के समर्थन का दायरा बढ़ता जा रहा है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल, मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया.’’ ये पंक्तियां मशहूर शायर और गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी की हैं. 

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